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Home Class 10th Solutions 10th Hindi

NCERT Class 10 Hindi Grammar (Hindi Vyakaran) वाच्य

by Sudhir
December 18, 2021
in 10th Hindi, Class 10th Solutions
Reading Time: 4 mins read
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NCERT Class 10th Hindi Solutions
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  • NCERT Class 10 Hindi Grammar (Hindi Vyakaran) वाच्य
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    • भाववाच्य
    • कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में वाच्य परिवर्तन
    • कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तित कुछ उदाहरण
    • कुछ अन्य उदाहरण
    • कुछ अन्य उदाहरण

NCERT Class 10 Hindi Grammar (Hindi Vyakaran) वाच्य

वाच्य

वाच्य- वाच्य का अर्थ है ‘बोलने का विषय।’

क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि उसके द्वारा किए गए विधान का विषय कर्ता है, कर्म है या भाव है, उसे वाच्य कहते हैं।

दूसरे शब्दों में क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि उसके प्रयोग का आधार कर्ता, कर्म या भाव है, उसे वाच्य कहते हैं।

जैसे –

राधा पत्र लिखती है।

पत्र राधा द्वारा लिखा जाता है।

तुमसे लिखा नहीं जाता।

प्रथम वाक्य में लिखना क्रिया का संबंध कर्ता यानि राधा से है। दूसरे वाक्य में कर्म प्रधान है। जिसमें पत्र (कर्म) उद्देश्य के स्थान पर आया है और इसी की प्रधानता है। ‘तुमसे लिखा नहीं जाता’वाक्य में क्रिया का संबंध न तो कर्ता से है और न ही कर्म से, इसका सम्बन्ध भाव से है।

वाच्य में तीन की प्रधानता होती है

1. कर्ता

2. कर्म

3. भाव

जैसे –

1. माधव क्रिकेट खेलता है।

(क्रिया कर्ता के अनुसार)

2. माधव द्वारा क्रिकेट खेला जाता है।

(क्रिया कर्म के अनुसार)

3. माधव से क्रिकेट खेला जाता है।

(क्रिया भाव के अनुसार)

वाच्य के भेद

वाच्य के भेद-हिंदी में वाच्य के तीन भेद माने जाते हैं –

  1. कर्तृवाच्य
  2. कर्मवाच्य
  3. भाववाच्य

कर्तृवाच्य

जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष, कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हों, तो कर्तृवाच्य कहलाया जाता है।
सरल शब्दों में – क्रिया के जिस रूप में कर्ता प्रधान हो, उसे कर्तृवाच्य कहते हैं। इसमें लिंग एवं वचन प्रायः कर्ता के अनुसार होते हैं।

उदाहरण –
रमेश केला खाता है।
दिनेश पुस्तक पढ़ता है।
इन दोनों वाक्यों में कर्ता प्रधान है तथा उसी के लिए ‘खाता है’ तथा ‘पढ़ता है’ क्रियाओं का प्रयोग हुआ है, इसलिए यहाँ कर्तृवाच्य है।

कर्मवाच्य

जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष, कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हो, तो कर्मवाच्य कहलाता है अथवा क्रिया के उस रूपान्तर को कर्मवाच्य कहते हैं जिससे यह ज्ञात हो कि वाक्य में कर्ता की प्रमुखता न होकर कर्म की प्रमुखता है।
सरल शब्दों में – क्रिया के जिस रूप में कर्म प्रधान हो, उसे कर्मवाच्य कहते हैं या जहाँ क्रिया का संबंध सीधा कर्म से हो तथा क्रिया का लिंग तथा वचन कर्म के अनुसार हो, उसे कर्मवाच्य कहते हैं।

उदाहरण –
मीरा ने दूध पीया।
मीरा ने पत्र लिखा।
– पहले वाक्य में ‘मीरा’ (कर्ता) स्त्रीलिंग है परन्तु ‘पीया’क्रिया का एकवचन, ‘पुल्लिंग’रूप ‘दूध’(कर्म) के अनुसार आया है।
– दूसरे वाक्य में भी ‘मीरा’ (कर्ता) स्त्रीलिंग है परन्तु ‘लिखा’क्रिया का एकवचन, ‘पुल्लिंग’रूप ‘पत्र’(कर्म) के अनुसार आया है।

अतः स्पष्ट है कि यहाँ कर्मवाच्य है।

ध्यान रखने योग्य बात यह है कि कर्मवाच्य सदैव सकर्मक क्रिया का ही होता है।

भाववाच्य

जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता अथवा कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार न होकर एकवचन, पुंलिंग तथा अन्य पुरुष हो, तो भाववाच्य कहलाता है।
दूसरे शब्दों में – क्रिया के जिस रूप में न तो कर्ता की प्रधानता हो, न कर्म की, बल्कि क्रिया का भाव ही प्रधान हो, वहाँ भाववाच्य होता है। इसमें मुख्यतः अकर्मक क्रिया का ही प्रयोग होता है और साथ ही प्रायः निषेधार्थक वाक्य ही भाववाच्य में प्रयुक्त होते हैं। इसमें क्रिया सदैव पुल्लिंग, अन्य पुरुष के एक वचन की होती है।

उदाहरण –
मोहन से टहला भी नहीं जाता।
मुझसे उठा नहीं जाता।
धूप में चला नहीं जाता।
उक्त वाक्यों में कर्ता या कर्म प्रधान न होकर भाव मुख्य हैं, अतः इनकी क्रियाएँ भाववाच्य का उदाहरण हैं।

ध्यान रखने योग्य कुछ बातें हैं –
1. भाववाच्य का प्रयोग विवशता, असमर्थता व्यक्त करने के लिए होता है।
2. भाववाच्य में प्रायः अकर्मक क्रिया होता है।
3. भाववाच्य में क्रिया सदैव अन्य पुरुष, पुल्लिंग और एकवचन में होती है।

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में वाच्य परिवर्तन

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में वाच्य परिवर्तन के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए-

  • कर्तृवाच्य के कर्ता के साथ यदि कोई विभक्ति लगी हो, तो उसे हटाकर ‘के’ अथवा ‘के द्वारा’ परसर्ग का प्रयोग किया जाता है।
  • कर्म के साथ कोई परसर्ग हो तो उसे हटा दिया जाता है।
  • कर्तृवाच्य की मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल में परिवर्तित किया जाता है।
  • परिवर्तित क्रिया के साथ ‘जाना’ क्रिया का काल, पुरुष, वचन और लिंग के अनुसार जो रूप हो, उसे जोड़कर साधारण क्रिया को संयुक्त क्रिया में बदला जाता है।

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तित कुछ उदाहरण

कर्तृवाच्यकर्मवाच्य
1चित्रकार चित्र बनाता है।चित्रकार द्वारा चित्र बनाया जाता है।
2राधा नृत्य करती है।राधा द्वारा नृत्य किया जाता है।
3पुलिस ने अपराधी को पकड़ा।पुलिस द्वारा अपराधी को पकड़ा गया।
4यह दूकान पिता जी ने बनवाई थी।यह दूकान पिता जी के द्वारा बनवाई गई थी।
5निशा ने अच्छी कविता लिखी है।निशा द्वारा अच्छी कविता लिखी गई।

कुछ अन्य उदाहरण

1. सरोज पत्र लिखती है।
1. सरोज से पत्र लिखा जाता है।

2. बच्ची ने गुड़िया को सुला दिया।

2. बच्ची द्वारा गुड़िया को सुला दिया गया।

3. रोहन खाना नहीं खाएगा।
3. रोहन द्वारा खाना नहीं खाया जाएगा।

4. हम इस काम को नहीं कर सकते।
4. हमारे द्वारा इस काम को नहीं किया जा सकता।

5. ऋतिक टहनी तोड़ेगा।
5. ऋतिक से टहनी तोड़ी जाएगी।

6. सुरेश चित्र बनाता है।
6. सुरेश से चित्र बनाया जाता है।

7. मैंने भोजन खाया।
7. मेरे द्वारा भोजन खाया गया।

8. प्रजा को कष्ट दिया
8. प्रजा को कष्ट दिया गया।

9. डॉक्टर दवाई बांट रहे है।
9. डॉक्टर से दवाई बांटी जा रही है।


10. वह नजारा देख नहीं सका
10. वह नजारा देखा नहीं गया

कर्तृवाच्य से भाववाच्य में वाच्य परिवर्तन

कर्तृवाच्य से भाववाच्य में वाच्य परिवर्तन के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए-

  • कर्ता के साथ ‘से’ विभक्ति चिह्न लगा दिया जाता है।
  • क्रिया को सामान्य भूत काल में लाकर उसक साथ काल के अनुसार ‘जाना’ क्रिया रूप जोड़ा जाता है।
  • क्रिया को एकवचन, पुल्लिंग और अन्य पुरुष में परिवर्तित कर दिया जाता है।
  • आवश्यकतानुसार निबंध सूचक ‘नहीं‘ का प्रयोग होता है।

कर्तृवाच्य से भाववाच्य में परिवर्तित कुछ उदाहरण

कर्तृवाच्यभाववाच्य
1राधा नहीं हंसती।राधा से हँसा नहीं जाता।
2मैं पढ़ नहीं सकती।मुझसे पढ़ा नहीं जाता।
3अब घूमें।अब घूमा जाए।
4मजदूरों ने ईंट नहीं उठाई।मजदूरों से ईंट उठाई नहीं जाती।
5बूढ़ी माँ चल नहीं सकती।बूढ़ी माँ से चला नहीं जाता।

कुछ अन्य उदाहरण

1. मनीष बाहर सो रहा है।
1. मनीष से बाहर सोया जा रहा है।

2. चील आकाश में उड़ चुके हैं।
2. चील द्वारा आकाश में उड़ा जा चुका है।

3. क्या सुरेश खेलेगा?
3. क्या सुरेश से खेला जाएगा?

4. वह सो गया।
4. उसके द्वारा सोया गया।

5. घनश्याम चल रहा था।
5. घनश्याम द्वारा चला जा रहा था।

6. मैं सोच रहा हूँ।
6. मुझसे सोचा जा रहा है।

7. साक्षी बैठ नहीं सकी।
7. साक्षी द्वारा बैठा नहीं जा सका।

8. चलो, अब सोयें।
8. चलो, अब सोया जाए।

9. बहु लड़ नहीं सकी।
9. बहु द्वारा लड़ा नहीं जा सका।

10. खरगोश दौड़ रहा था।
10. खरगोश से दौड़ा जा रहा था।

कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य बनाना-

1. बच्चे से कहानी सुनाई जाएगी।

1. बच्चा कहानी सुनाएगा।

2. मां द्वारा मिठाई बनाई जाती है।

2. मां मिठाई बनाती है।

3. रोहन से मूर्ति बनाई जाती है।

3. रोहन मूर्ति बनाता है।

4. निकिता द्वारा भोजन बनाया गया।

4. निकिता ने भोजन बनाया ।

5. गरीबों में जूते बांटे गए।
5. गरीबों में जूते बाटें।

भाववाच्य से कर्तृवाच्य बनाना-

1. बच्चे से खूब खिलखिलाया गया।
1. बच्चा खूब खिलखिलाया ।

2. हमसे रहा नहीं गया।

2. हम रह नहीं पाए।

3. हनी से हंसा जाता है।

3. हनी हंसता है।

4. उससे रोया भी नहीं जा सका।

4. वह रो भी नहीं सकी।

5. सरिता से घर में सोया जाता है।

5. सरिता घर में सोती है ।

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