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NCERT Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 11 डायरी का एक पन्ना

by Sudhir
December 28, 2021
in Class 10th Solutions, 10th Hindi
Reading Time: 6 mins read
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NCERT Class 10th Hindi Solutions
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Table of Contents

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  • NCERT Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 11 डायरी का एक पन्ना
    • पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
      • मौखिक
      • लिखित
    • भाषा अध्ययन
    • योग्यता विस्तार
    • परियोजना कार्य
    • अन्य पाठेतर हल प्रश्न
      • लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
      • दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

NCERT Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 11 डायरी का एक पन्ना

NCERT Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 11 are provided here. We have covered all the intext questions of your textbook given in the lesson. We have also provided some additional questions which are important with respect to your exam. Read all of them to get good marks.

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

मौखिक

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

प्रश्न 1.
कलकतावासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्त्वपूर्ण था?
उत्तर

कलकत्तावासियों के लिए 26 जनवरी 1931 को दिन इसलिए महत्त्वपूर्ण था क्योंकि आज के ही दिन को सारे हिंदुस्तान में स्वतंत्रता की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जा रहा था। इस दिन कलकत्तावासियों को स्वयं को देशभक्त सिद्ध करने का मौका मिल रहा था।

प्रश्न 2.
सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था? ।
उत्तर

सुभाष बाबू के जुलूस को सफल बनाने की जिम्मेदारी पूर्णोदास पर थी।

प्रश्न 3.
विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर
अविनाश बाबू प्रांतीय विद्यार्थी संघ के मंत्री थे। उन्होंने श्रद्धानंद पार्क में झंडा गाड़ा तो पुलिस ने उनको पकड़ लिया। उनके साथ आए लोगों को मारा-पीटा और वहाँ से हटा दिया।

प्रश्न 4.
लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का संकेत देना चाहते थे?
उत्तर

लोग अपने-अपने मकानों तथा सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर यह संकेत देना चाहते थे कि वे स्वतंत्रता पाने के लिए लालायित हैं तथा इसके लिए अपना सहयोग देने को तैयार हैं।

प्रश्न 5.
पुलिस ने बड़े-बड़े पार्को तथा मैदानों को क्यों घेर लिया था?
उत्तर
पुलिस कमिश्नर यह नहीं चाहते थे कि सभा में भाग लेनेवाले कार्यकर्ता और जनता एकजुट होकर झंडा फहराए और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़े। इसलिए पुलिस ने बड़े-बड़े पार्को और मैदानों को घेर लिया था।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए

प्रश्न 1.
26 जनवरी 1981 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गई?
उत्तर

26 जनवरी 1931 का दिन कलकतावासियों के लिए महत्त्वपूर्ण था। इसे अमर बनाने के लिए कलकतावासियों ने एकजुट होकर काफी तैयारियाँ कीं। शहरों के प्रत्येक भाग में राष्ट्रीय झंडे लगाए। बड़े बाजार के प्रायः सभी मकानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा रहे थे। कई मकान तो ऐसे सजाए गए थे मानो स्वतंत्रता मिल गई हो। प्रत्येक मार्ग पर उत्साह और नवीनता दिखाई देती थी।

प्रश्न 2.
आज जो बात थी वह निराली थी-किस बात से पता चल रहा था कि आज का दिन अपनेआप में निराला है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर

आज अर्थात् 26 जनवरी, 1931 को कोलकाता में लोगों ने स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए पुलिस क़ी लाठियाँ खाईं और गिरफ्तारियाँ दी। इसे सफल बनाने में महिलाओं ने भाग लेते हुए ऐसा कुछ किया जैसा कोलकाता में पहले कभी नहीं हुआ था।

प्रश्न 3.
पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?
उत्तर

पुलिस कमिश्नर द्वारा निकाले गए नोटिस में लिखा था कि अमुक धारा के अनुसार कोई सभा नहीं हो सकती। सभी कार्यकताओं को नोटिस दे दिया गया यदि आप सभा में भाग लेंगे तो दोषी समझे जाएँगे। इधर कौंसिल की तरफ से यह नोटिस निकाला गया था कि मोनूमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा तथा स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। सर्व साधारण की उपस्थिति होनी चाहिए। कौंसिल की तरफ से यह खुली चुनौती थी।

प्रश्न 4.
धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?
उत्तर

धर्मतल्ले के मोड़ पर जुलूस इसलिए टूट गया क्योंकि पुलिस की लाठियों से बहुत से लोग घायल हो गए थे, फिर भी पुलिस लाठियाँ भाँज रही थी, इसलिए जुलूस तितर-बितर हो गया।

प्रश्न 5.
डॉ. दासगुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेखकर ही रहे थे, उनके फोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर

डॉ. दासगुप्ता द्वारा घायल लोगों के फोटो खिंचवाने की यह वजह हो सकती है कि अपनी स्वतंत्रता की माँग करनेवाले भारतीय लोगों पर अंग्रेजी सरकार द्वारा ढाए जाने वाले जुल्मों का प्रत्यक्ष प्रमाण पत्र लोगों को दिखाया जा सके। यह भी हो सकता है कि पुलिस की इस बर्बरता को देखकर देश के अन्य लोग भी प्रेरित होकर देश की स्वतंत्रता के लिए आगे आएँ और संगठित होकर सरकार की गलत नीतियों का विरोध करें।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

प्रश्न 1.
सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?
उत्तर

सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। गुजराती सेविका संघ की ओर से जुलूस निकाला गया। मारवाड़ी बालिका विद्यालय में झंडोत्सव मनाया गया जिसमें जानकी देवी और मदालसा बज़ाज जैसी स्त्रियों ने भी भाग लिया। पुलिस द्वारा किए गए प्रबंध और लाठीचार्ज की परवाह किए बिना ही जगह-जगह से स्त्रियाँ मोनुमेंट के पास पहुँचीं। सरकारी कानून का उल्लंघन कर लगभग 105 स्त्रियों ने अपनी गिरफ्तारी दी। आंदोलनकारियों के साथ मिलकर स्त्रियाँ भी। पुलिस की बर्बरता की शिकार हुईं।

प्रश्न 2.
जुलूस के लालबाज़ार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?
उत्तर

जुलूस के लालबाज़ार आने पर स्त्रियों के साथ बड़ी भीड़ एकत्र हो गई। इससे पुलिस जो अब तक ठंडी पड़ी थी, उसने डंडे बरसाने शुरू कर दिए। भीड़ अधिक होने के कारण इस बार बहुत से लोग घायल हो गए। पुलिस ने और भी कई लोगों को गिरफ्तार किया। यही वृजलाल गोयनका झंडा लेकर मोनुमेंट की ओर इतनी जोर से दौड़ा कि स्वयं गिर पड़ा। पुलिस ने उसे पकड़ा और कुछ दूर पर छोड़ दिया।

प्रश्न 3.
जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी। यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर

कलकत्ता में 26 जनवरी 1931 को पुलिस कमिश्नर दूद्वारा नोटिस निकाला गया कि अमुक धारा के अनुसार वहाँ कोई सभा नहीं हो सकती और सभा में भाग लेनेवाले व्यक्ति को दोषी समझा जाएगा। लेकिन उनके द्वारा बनाए गए इस कानून को भंग करते हुए कौंसिल की तरफ से उन्हें खुली चुनौती दी गई कि उसी दिन मोनुमेंट के नीचे लोग इकट्ठे होकर झंडा फहराएँगे। अंग्रेज़ी सरकार स्वतंत्रता का विरोध करने के लिए जो भी नियम बनाती थी उसे भंग करना अनुचित नहीं कहा जा सकता क्योंकि हमारे विचार में देश की रक्षा करना, स्वतंत्रता के लिए प्रयास करना और राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार हर देशवासियों को होना चाहिए।

प्रश्न 4.
बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर

भारत में स्वतंत्रता दिवस मनाने की पुनरावृत्ति के क्रम में 26 जनवरी 1931 को भारत की स्वतंत्रता हेतु व्यापक संघर्ष किया गया। लोगों ने उत्साह एवं उल्लास से अपने घरों को सजाया और अपनी भागीदारी निभाई। इसके लिए उन्होंने पुलिस की लाठियाँ खाईं, घायल हुए और जेलों में बंद किए गए। ऐसे लोगों की संख्या एक-दो न होकर दो सौ से अधिक थी और पकड़े गए लोगों की संख्या काफी ज्यादा। ऐसा कलकत्ता में पहली बार हुआ था इसलिए अपूर्व था।

(ग) निम्नलिखित को आशय स्पष्ट कीजिए-

प्रश्न 1.
आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया।
उत्तर

26 जनवरी 1931 से पहले यह कहा जाता था कि कलकत्ता में स्वतंत्रता संग्राम हेतु अधिक कार्य नहीं किया जाता। यह बात कलकत्ता और कलकत्तावासियों के लिए कलंक के समान थी। 26 जनवरी 1931 को भारत की स्वतंत्रता हेतु कलकत्तावासियों ने संगठित होकर संघर्ष किया। सुभाषचंद्र बोस, सीताराम सेकसरिया तथा अन्य कलकत्तावासियों ने देश का दूसरा स्वतंत्रता दिवस बहुत जोश से मनाया। अंग्रेज़ प्रशासकों ने इसे उनका अपराध मानते हुए उन पर अनेक हिंसात्मक जुल्म किए। क्रांतिकारियों ने अपनी कुर्बानियाँ दीं। सैकड़ों लोग घायल हुए तथा अनेक गिरफ्तारियाँ दी गईं। इस दिन पुलिस की लाठियाँ से घायल होकर भी लोगों ने पूरे सम्मान से राष्ट्रीय ध्वज फहराकर स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी। इस प्रकार कलकत्तावासियों के मस्तक पर लगा कलंक बहुत अंश में धुल गया।

प्रश्न 2.
खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले कहीं नहीं की गई थी।
उत्तर

स्वतंत्रता पाने की दिशा में भारतीयों द्वारा जो भी कदम उठाए जा रहे थे चाहे आंदोलन या विरोध प्रदर्शन, सब सरकार की नज़र बचाकर लुके-छिपे किया जाता था परंतु इस बार एक ओर सरकार ने सभा को गैर कानूनी घोषित करते हुए सभा न करने की घोषणा की थी तो दूसरी ओर कौंसिल ने मोनुमेंट पर झंडा फहराने और प्रतिज्ञा पढ़ने के लिए लोगों का आह्वान किया था ताकि अधिकाधिक संख्या में लोग उपस्थित हों। इस प्रकार यह खुला चैलेंज था।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
रचना की दृष्टि से वाक्य तीन प्रकार के होते हैं-
सरल वाक्य-सरल वाक्य में कर्ता, कर्म, पूरक क्रिया और क्रियाविशेषण घटकों या इनमें से कुछ घटकों का योग होता है। स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त होनेवाला. उपवाक्य ही सरल वाक्य है। उदाहरण-लोग टोलियाँ बनाकर मैदान में घूमने लगे।
संयुक्त वाक्य-जिस वाक्य में दो या दो से अधिक स्वतंत्र या मुख्य उपवाक्य समानाधिकरण योजक से जुड़े हों, वह संयुक्त वाक्य कहलाता है। योजक शब्द-और, परंतु, इसलिए आदि
उदाहरण-मोनुमेंट से नीचे झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी।
मिश्र वाक्य-वह वाक्य जिसमें एक प्रधान उपवाक्य हो और एक से अधिक आश्रित अपवाक्य हों, मिश्र वाक्य कहलाता है।
उदाहरण-जब अविनाश बाबू ने झंडा गाड़ा तब पुलिस ने उनको पकड़ लिया।
निम्नलिखित वाक्यों को सरल वाक्यों में बदलिए
उत्तर

I.
प्रश्न (क) दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाज़ार गया और वहाँ पर गिरफ्तार हो गया।
उत्तर

दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाज़ार जाकर गिरफ्तार हो गया।

प्रश्न (ख) मैदान में हज़ारों आदमियों की भीड़ होने लगी और लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे।
उत्तर
मैदान में हजारों आदमियों की भीड़ होने पर लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे।

प्रश्न (ग) सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया और गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप में भेज दिया गया।
उत्तर
सुभाष बाबू को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप में भेज दिया गया।

II. ‘बड़े भाई साहब’ पाठ में से भी दो-दो सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य छाँटकर लिखिए
सरलः

  1. इतिहास में रावण का हाल तो पढ़ा ही होगा।
  2. हमेशा सिर पर एक नंगी तलवार-सी लटकती मालूम होती।

संयुक्तः

  1.  मेरी तकदीर बलवान है इसलिए भाई साहब के डर से जो थोड़-बहुत पढ़ लिया करता था, वह भी बंद हुआ।
  2. मुद्रा कांतिहीन हो गई थी, मगर बेचारे फेल हो गए।

मिश्रः

  1. मुझे कुछ ऐसी धारणा हुई कि मैं पास ही हो जाऊँगा।
  2. सहसा भाई साहब से मेरी मुठभेड़ हो गई, जो शायद बाज़ार से लौट रहे थे।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं को ध्यान से पढ़िए और समझिए कि जाना, रहना और चुकना क्रियाओं का प्रयोग किस प्रकार किया गया है?
उत्तर
(क)

  1. कई मकान सजाए गए थे।
  2. कलकत्ते के प्रत्येक भाग में झंडे लगाए गए थे।

(ख)

  1. बड़े बाज़ार के प्रायः मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहरा रहा था।
  2. कितनी ही लारियाँ शहर में घुमाई जा रही थीं।
  3. पुलिस भी अपनी पूरी ताकत से शहर में गश्त देकर प्रदर्शन कर रही थी।

(ग)

  1. सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदासे परे था, वह प्रबंध कर चुका था।
  2. पुलिस कमिश्नर का नोटिस निकल चुका था।

उत्तर– उपरिलिखित वाक्यों को पढ़ने और समझने से पता चलता है कि इनमें ‘जाना’, ‘रहना’ और ‘चुकना’ क्रियाओं का प्रयोग मुख्य क्रिया के रूप में न करके रंजक क्रिया के रूप में किया गया है। इससे इनकी मुख्य क्रियाएँ संयुक्त क्रिया बन गई हैं।

प्रश्न 3.
नीचे दिए गए शब्दों की संरचना पर ध्यान दीजिए-
विद्या + अर्थी – विद्यार्थी

‘विद्या’ शब्द का अंतिम स्वर ‘आ’ और दूसरे शब्द ‘अर्थी की प्रथम स्वर ध्वनि ‘अ’ जब मिलते हैं तो वे मिलकर दीर्घ स्वर ‘आ’ में बदल जाते हैं। यह स्वर संधि है जो संधि का ही एक प्रकार है।

संधि शब्द का अर्थ है-जोड़ना। जब दो शब्द पास-पास आते हैं तो पहले शब्द की अंतिम ध्वनि बाद में आनेवाले शब्द की पहली ध्वनि से मिलकर उसे प्रभावित करती है। ध्वनि परिवर्तन की इस प्रक्रिया को संधि कहते हैं। संधि तीन प्रकार की होती है-स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि। जब संधि युक्त पदों को अलग-अलग किया जाता है तो उसे संधि विच्छेद कहते हैं।
जैसे-विद्यालय = विद्या + आलय
नीचे दिए गए शब्दों की संधि कीजिए-

श्रद्धा + आनंद = ….
प्रति + एक = …….
पुरुष + उत्तम = ………
झंडा + उत्सव = ……..
पुनः + आवृत्ति = ………
ज्योतिः + मय = …….

उत्तर :- श्रद्धा + आनंद = श्रद्धानंद
प्रति + एक = प्रत्येक
पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम
झंडा + उत्सव = झंडोत्सव
पुनः + आवृत्ति = पुनरावृत्ति
ज्योतिः + मय = ज्योतिर्मय


योग्यता विस्तार

प्रश्न 1. भौतिक रूप से दबे हुए होने पर भी अंग्रेजों के समय में ही हमारा मन आजाद हो चुका था। अत: दिसंबर सन् 1929 में लाहौर में कांग्रेस का एक बड़ा अधिवेशन हुआ, इसके सभापति जवाहरलाल नेहरू जी थे। इस अधिवेशन में यह प्रस्ताव पास किया गया कि अब हम ‘पूर्ण स्वराज्य से कुछ भी कम स्वीकार नहीं करेंगे। 26 जनवरी 1930 को देशवासियों ने पूर्ण स्वतंत्रता के लिए हर प्रकार के बलिदान । की प्रतिज्ञा की। उसके बाद आज़ादी प्राप्त होने तक प्रतिवर्ष 26 जनवरी को स्वाधीनता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। आजादी मिलने के बाद 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

उत्तर- यह छात्रों की जानकारी के लिए है।


प्रश्न 2. डायरी-यह गद्य की एक विधा है। इसमें दैनिक जीवन में होने वाली घटनाओं, अनुभवों को वर्णित किया जाता है। आप भी अपनी दैनिक जीवन से संबंधित घटनाओं को डायरी में लिखने का अभ्यास करें।

उत्तर- 09 जनवरी, 2016
शनिवार

जनवरी महीने का पूर्वार्ध बीतने को है। लगता है इस बार दिल्ली से सरदी रूठी ही रहेगी। सरदी का बहाना करके भी बिस्तर में देर तक नहीं पड़ा रह सकता। अरे! हाँ, याद आया आज तो हमें माता-पिता के साथ चिड़ियाघर देखने जाना है। उठकर जल्दी तैयार होता हूँ। अरे! यह क्या पिता जी कार साफ़ करा रहे हैं। लगता है, वे कार से चिड़ियाघर जाना चाहते हैं। लगता है कि उन्हें याद नहीं कि आज तो दिल्ली की सड़कों पर आड (विषम) नंबर की गाड़ियाँ ही चलेंगी। हमारी कार तो इवन (सम) नंबर की है। पिता जी, उसमें समान रखवाएँ, इससे पहले यह याद दिलाता हूँ। उनसे कहता हूँ कि या तो मेट्रो से चलें या कल रविवार को। आज तो इवन नंबर की कार में चलना ठीक न रहेगा, है न।

मोहित


प्रश्न 3. जमना लाल बजाज, महात्मा गांधी के पाँचवें पुत्र के रूप में जाने जाते हैं, क्यों? अध्यापक से जानकारी प्राप्त करें।

उत्तर- जमनालाल बजाज, बजाज उद्योग घराने के संस्थापक थे। कभी वे राजस्थान के प्रसिद्ध व्यापारी हुआ करते थे। ये अपनी व्यावसायिक एवं प्रशासनिक कुशलता से अंग्रेजों के प्रिय बन गए। इन्हें राय बहादुर की उपाधि देकर अंग्रेजों ने सम्मानित किया। जमनालाल को जब गांधी जी का सान्निध्य मिला तो वे गांधी जी से अत्यंत प्रभावित हुए और गांधी जी के शिष्य बन गए। इससे उनका स्वाभिमान जाग उठा और उन्होंने अंग्रेजों का सम्मान लौटाया ही नहीं बल्कि गांधी जी अनुयायी भी बन गए। उनके द्वारा वर्धा में सेवा संघ की स्थापना की गई। वे गांधी जी के सिद्धांत सत्य और अहिंसा का पालन करते थे। अपने सिद्धांत के प्रति ऐसा समर्पण देख गांधी जी उन्हें अपना पुत्र मानने लगे। कालांतर में जमनालाल को गांधी जी के पाँचवें पुत्र के रूप में जाना जाने लगा।


प्रश्न 4. ढाई लाख का जानकी देवी पुरस्कार जमना लाल बजाज फाउंडेशन द्वारा पूरे भारत में सराहनीय कार्य करने वाली महिलाओं
को दिया जाता है। यहाँ ऐसी कुछ महिलाओं के नाम दिए जा रहे है-
ंश्रीमती अनुताई लिमये 1993 महाराष्ट्र; सरस्वती गोरा 1996 आंध्र प्रदेश;
मीना अग्रवाल 1996 असम, सिस्टर मैथिली 1999 केरल; कुंतला कुमारी आचार्य 2001 उड़ीसा।
इनमें से किसी एक के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कीजिए।

उत्तर- छात्र स्वयं करें।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1. स्वतंत्रता आंदोलन में निम्नलिखित महिलाओं में जो होगदान दिया, उसके बारे में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करके लिखिए-
(क) सरोजिनी नायडू
(ख) अरुणा आसफ अली
(ग) कस्तूरबा गांधी

उत्तर- छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2. इस पाठ के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में कलकलाई कोलकाता ) के योगदान का चित्र स्पष्ट होता है। आजादी के आंदोलन में आपके क्षेत्र का भी किसी न किसी प्रकार का योगदान रहा होगा पुस्तकालय, अपने परिचितों या फिर किसी दूसरे स्त्रोत से इस संबंध में जानकारी हासिल कर लिखिए।

उत्तर- छात्र स्वयं करें।


प्रश्न 3. ‘केवल प्रचार में दो हजार रुपया खर्च किया गया था। तत्कालीन समय को मद्देनज़र रखते हुए अनुमान लगाइए कि प्रचार-प्रसार के लिए किन माध्यमों का उपयोग किया गया होगा?

उत्तर- तत्कालीन समय अर्थात् 1930-31 में प्रचार-प्रसार के लिए बहुत सारे झंडे बनवाए गए होंगे, प्रचार के पंपलेट (इश्तिहार) छपवाकर बाँटे गए होंगे, दीवारों पर नारे या स्लोगन लिखे गए होंगे। इसके अलावा कार्यकर्ताओं को दूर-दराज के क्षेत्रों में आने-जाने (प्रचारार्थ) के लिए कुछ नकद भी दिया गया होगा।


प्रश्न 4. आपको अपने विद्यालय में लगने वाले पल्स पोलियो केंद्र की सूचना पूरे मोहल्ले को देनी है। आप इस बात का प्रचार बिना पैसे के कैसे कर पाएँगे? उदाहरण के साथ लिखिए।

उत्तर- मैं अपनी कॉलोनी के आसपास स्थित झुग्गी बस्तियों में अपने मित्रों के साथ जाऊँगा और पल्स पोलियो ड्राप पिलवाने का अनुरोध करूँगा तथा पोलियो के खतरे से भी सावधान करूंगा।

अन्य पाठेतर हल प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. 26 जनवरी, 1931 को पार्को और मैदानों में पुलिस ही पुलिस दिखती थी, क्यों?

उत्तर- 26 जनवरी, 1931 को कोलकाता में स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए क्रांतिकारियों और देशभक्तों द्वारा स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत ध्वजारोहण और प्रतिज्ञा लेना तय किया गया था। इसे रोकने के लिए पार्क और मैदान में पुलिस ही पुलिस दिखती थी।

प्रश्न 2. तारा सुंदरी पार्क में पुलिस ने लोगों को रोकने के लिए क्या किया?

उत्तर- तारा सुंदरी पार्क में बड़ा बाजार कांग्रेस कमेटी के युद्ध मंत्री हरिश्चंद सिंह को झंडा फहराने भीतर न जाने दिया। पुलिस ने वहाँ काफ़ी मारपीट की जिसमें दो-चार आदमियों के सिर फट गए। गुजराती सेविका संघ की ओर से निकाले गए जुलूस में शामिल लड़कियों को गिरफ्तार कर उन्हें रोकने का प्रयास किया गया।

 
प्रश्न 3. पुलिस कमिश्नर द्वारा निकाली गई नोटिस का कथ्य स्पष्ट करते हुए बताइए कि यह नोटिस क्यों निकाली गई होगी?

उत्तर- पुलिस कमिश्नर द्वारा निकाली गई नोटिस का कथ्य यह था कि अमुक-अमुक धारा के अंतर्गत सभा नहीं हो सकती है। यदि आप भाग लेंगे तो दोषी समझे जाएँगे। यह नोटिस इसलिए निकाली गई होगी ताकि इस दिन झंडा फहराने और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा लेने के कार्यक्रम को विफल बनाया जा सके।


प्रश्न 4. कौंसिल की तरफ़ से निकाली गर्ट नोटिस का प्रकट एवं उद्देश्य क्या था?

उत्तर- कौंसिल द्वारा निकाली गई नोटिस का मूलकथ्य यह था कि मोनुमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा तथा स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। सर्वसाधारण की उपस्थिति होनी चाहिए। इस नोटिस का उद्देश्य था स्वतंत्रता दिवस मनाने की पुनरावृत्ति करना तथा पूर्ण आजादी की माँग करना।


प्रश्न 5. जुलूस को न रोक पाने की दी। पुलिस ने किस तरह उतारी ?

उत्तर- भीड़ की अधिकता के कारण पुलिस जुलूस को जब न रोक सकी तो उसने अपनी खीझ उतारने के लिए मैदान के मोड़ पर पहुँचते ही जुलूस पर लाठियाँ चलानी शुरू कर दी। इसमें बहुत से आदमी घायल हुए। पुलिस की लाठियों से सुभाष चंद्र बोस भी न बच सके।


प्रश्न 6. झंडा दिवस के अवसर पर पुलिस का कृर प देखने को मिला। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- झंडा दिवस अर्थात् 26 जनवरी 1931 को भारतीयों द्वारा जो कार्यक्रम मनाने का निश्चय किया गया था, उसे रोकने के प्रयास में पुलिस का क्रूरतम रूप देखने को मिला। पुलिस जुलूस में शामिल लोगों पर लाठी चार्ज कर रही थी, जिससे लोग। लहूलुहान हो रहे थे। पुलिस महिलाओं और लड़कियों के साथ भी मारपीट कर रही थी।


प्रश्न 7. पुलिस जिस समय मोनुमेंट की मोटियाँ न हो थी, उस समय दूसरी ओर महिलाएँ किस काम में लगी थी ?

उत्तर- मोनुमेंट के नीचे पुलिस जिस समय लोगों पर लाठियाँ भाँज रही थी और लोग लहूलुहान हो रहे थे उसी समय दूसरी ओर महिलाएँ मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहरा रही थी और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ रही थी। ऐसा करके वे झंडा दिवस कार्यक्रम को सफल एवं संपन्न करने में जुटी थी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. 26 जनवरी, 1937 को कोलकाता के स्तों पर उत्साह और नवीनता देखते ही बनती थी। इसके कारणों एवं नएपन का वर्णन कीजिए।

उत्तर- 26 जनवरी, 1931 को कोलकाता में स्वतंत्रता दिवस मनाये जाने की पुनरावृत्ति होनी थी। इस दृष्टि से इस महत्त्वपूर्ण दिन को अत्यंत हर्षोल्लास से मनाया जाना था। इस बार का उत्साह भी देखते ही बनता था। इसके प्रचार मात्र पर ही दो हज़ारे रुपये खर्च किए गए थे। कार्यकर्ताओं को झंडा देते हुए उन्हें घर-घर जाकर समझाया गया था कि आंदोलन की सफलता उनके प्रयासों पर ही निर्भर करती है। ऐसे में आगे आकर उन्हें ही सारा इंतजाम करना था। इसे सफल बनाने के लिए घरों और रास्तों पर झंडे लगाए गए थे। इसके अलावा जुलूस में शामिल, लोगों का उत्साह चरम पर था। उन्हें पुलिस की लाठियाँ भी रोक पाने में असमर्थ साबित हो रही थीं।

प्रश्न 2. 26 जनवरी, 1931 को सुभाषचंद्र ४ का एक नया रूप एवं सशक्त नेतृत्व देखने को मिला। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- 26 जनवरी, 1931 को कोलकाता में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाना था। गतवर्ष इसी दिन पूर्ण स्वराज्य पाने के लिए झंडा तो फहराया गया था पर इसका आयोजन भव्य न बन सका था। आज झंडा फहराने और प्रतिज्ञा लेने के इस कार्यक्रम में सुभाषचंद्र के क्रांतिकारी रूप का दर्शन हो रहा था। वे जुलूस के साथ असीम उत्साह के साथ मोनुमेंट की ओर बढ़ रहे थे। उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने लाठियाँ भाँजनी शुरू कर दी थी फिर भी वे चोट की परवाह किए बिना निडरता से आगे ही आगे बढ़ते जा रहे थे और ज़ोर-ज़ोर से ‘वंदे मातरम्’ बोलते जा रहे थे। पुलिस की लाठियाँ उन पर भी पड़ी।
यह देख ज्योतिर्मय गांगुली ने उन्हें पुलिस से दूर अपनी ओर आने के लिए कहा पर सुभाषचंद्र ने कहा, आगे बढ़ना है। उनका यह कथन जुलूस को भी प्रेरित कर रहा था।

प्रश्न 3. वृजलाल गोयनका कौन थे? झंडा दिवस को सफल बनाने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालिए।

उत्तर- वृजलाल गोयनका स्वतंत्रता सेनानी थे, जो कई दिनों से लेखक के साथ काम कर रहे थे। वे दमदम जेल में भी लेखक के साथ थे। वे झंडा दिवस 26 जनवरी, 1931 को सभास्थल की ओर जाते हुए पकड़े गए। पहले तो वे झंडा लेकर ‘वंदे मातरम्’ बोलते हुए इतनी तेज गति से भागे कि अपने आप गिर गए। एक अंग्रेज घुड़सवार ने उन्हें लाठी मारी और पकड़ा परंतु थोड़ी दूर जाने के बाद छोड़ दिया। इस पर वे स्त्रियों के झुंड में शामिल हो गए, तब पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। तब वे दो सौ आदमियों का जुलूस लेकर लालबाजार गए जहाँ उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।


प्रश्न 4. ‘डायरी का एक पन्ना’ नामक पाठ के माध्यम से क्या संदेश दिया गया है?

उत्तर ‘डायरी का एक पन्ना’ नामक पाठ स्वतंत्रता का मूल्य समझाने एवं देश प्रेम व राष्ट्रभक्ति को जगाने तथा प्रगाढ़ करने का संदेश छिपाए हुए है। पाठ में सन् 1931 के गुलाम भारत के लोगों की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत की गई है कि किस प्रकार निहत्थे किंतु संगठित भारतवासियों के मन में स्वतंत्रता पाने की भावना बलवती हुई और इसे पाने के लिए लोगों ने न लाठियों की चिंता की और न जेल जाने की। वे आत्मोत्सर्ग के लिए तैयार रहते थे। यह पाठ हमें अपनी स्वतंत्रता की रक्षा । करने की जहाँ प्रेरणा देता है, वहीं यह संदेश भी देता है कि संगठित होकर काम करने से कोई काम असाध्य नहीं रह जाता है।

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